लघु कथा – सही आलोचक

आपने भारत की किसी यूनिवर्सिटी में किसी भी पद पर बिना सिफ़ारिश ( वह भी टॉप की ) कोई नियुक्ति न कभी देखी होगी, न पाई । प्रोफ़ेसर वर्मा भी बड़े जतन से सागर वि वि के हिंदी विभाग में तब रोपित किए गए थे जब वह तब के वि वि के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ राकेश जी के बरसों से […]

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आलोचना , समालोचना और समीक्षा शब्द की व्याख्या

आलोचना , समालोचना और समीक्षा शब्द की व्याख्या ! नोट : यह एक ऐसा विषय है जिस पर सैकड़ों किताबें बाजार में उपलब्ध हैं । कई पुस्तकों को पढ़ने के बाद भी जब तक अपनी खुद की चिंतन पद्धति विकसित न हो ; इस विषय को लेकर संशय की स्थिति बनी रहती है । इस आलेख में मैं सिर्फ आलोचना […]

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तुम्हारी गर्लफ्रेंड बहुत अच्छी है ..लेकिन मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ – एपिसोड 5

अंधेरे कमरे में ———— फ़िटनेस टेस्ट मेरी आशंका के विपरीत उत्साहजनक रहा। सिर्फ डिलवरी स्ट्राइड में मामूली दिक्कत हो रही थी। कोच सर ने कहा- “आजकल इधर-उधर बहुत उछलते हो इसलिए ये हाल है!” उनका इशारा सोनम की ओर था। खैर, मुझे 70 फीसदी मैच फिट करार दिया गया। पूरे ज़ोन के इकलौते रिवर्स स्विंग बॉलर को खिलाने के लिए […]

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तुम्हारी गर्लफ्रेंड बहुत अच्छी है..लेकिन मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ – एपिसोड 4

उफ्फ… ——— मेरे और उस लड़के के पंजे टकराए और आपस में उलझ गए। पहले हमारे हाथों का जोड़ हवा में अंग्रेजी के A अक्षर की तरह हवा में उठा और जोर लगने के बाद V की तरह नीचे आ गया। दोनों बराबरी का जोर लगा रहे थे। लड़का काफी दमदार था। मांसपेशियों पर तनाव आने से हमारे चेहरे अपनी […]

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तुम्हारी गर्लफ्रेंड बहुत अच्छी है..लेकिन मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ – एपिसोड 3

स्विमिंग पूल, सोनम और वो… ————————— अगले दिन- सोनम के कॉलेज में मेरी एंट्री एक खिलाड़ी के रूप में हो रही थी। जेवियर कॉलेज कैम्पस में शहर के सारे कॉलेजों की भागीदारी से स्पोर्ट्स वीक शुरू होने जा रहा था। जाहिर है मेरा कॉलेज भी शामिल था। सारे खेलों में बास्केटबॉल और क्रिकेट की हाइप ज्यादा थी। स्पोर्ट्स वीक सलेक्शन […]

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तुम्हारी गर्लफ्रेंड बहुत अच्छी है..लेकिन मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ – एपिसोड 2

कौन थी वो लड़की? —————— गर्ल्स हॉस्टल के 27 नम्बर कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई। – “आजा दिव्या …लॉक नहीं किया है…” उसने कहा। – ” दिव्या तो गई भारती के पास, अब तुमने अंदर बुलाया ही है तो मैं आ जाता हूँ मिस अमृता” -” ओह”ह…सर! आप!!! ” – ” रात होनेवाली है और मैं तुम्हारे कमरे में…तुम्हारे […]

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तुम्हारी गर्लफ्रेंड बहुत अच्छी है..लेकिन मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ – एपिसोड 1

मेरे लिए कॉलेज का मतलब था क्रिकेट। क्लासरूम से ज्यादा वक्त मेरा ग्राउंड पर बीतता था। अपने मिडिलक्लास कॉलेज का सबसे फ़ास्ट बॉलर और सामने पैसेवालों ( हम दोस्त यही कहा करते थे) के कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़की का बॉयफ्रेंड होना मेरी काबिले-जिक्र उपलब्धि थी। – ” मुझे तेरा बॉलिंग एक्शन बहुत अच्छा लगता है बिट्टू, बस इसलिए ही […]

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लेखन में गुलशन नंदा होना

लेखक मित्र सुधीर मौर्य से विगत दिनों हुई बातचीत में गुलशन नंदा जी का जिक्र निकल आया। मैं अक्सर सोचता हूँ कि नंदा जी जैसी ऊँचाई छू पाना भूत, भविष्य और वर्तमान में भी संभव नहीं है। मैं ऐसा क्यों कहा रहा हूँ? कारण यह है कि गुलशन नंदा जी के लेखकीय दौर में ही उनके नाम से नकली और […]

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कथा-संरचना: शैली-१

‘Genre’ कहिए, विधा या अंग कहिए, एक कथा या पुस्तक को ख़ास शैली में रख कर तो देखना ही होता है। आज अगर अमेज़न पर लिस्ट देखेंगे तो हिंदी की अधिकतर किताबें Literature —->Fiction या short stories में होगी। इसके अतिरिक्त भी हैं, जैसे बाल-साहित्य, आध्यात्म, यात्रा-संस्मरण, अकादमिक, इतिहास इत्यादि। पर कई पारंपरिक अंग जैसे निबंधकार लेखक और पाठक अब […]

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स्लीप पैरालिसिस

मैं भूल जाउंगी कि मैंने क्या कुछ लिखा था तुम भी भूल जाना कि तुमने क्या पढ़ा । मैं बहुत दिनों के लिए मर गयी थी। मेरा दोबारा जन्म हुआ है। एक लंबे समय से नींद जाने कौन सी रंजिश निभा रही है।अंदर एक चुप्पा सा पसरा हुआ है।एकाध घंटे को आँख लग भी जाए तो सिहरन भर देने वाले […]

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