डार्क नाइट वाला प्यार

बारिश की एक शाम ,दिन भर झम –झम करते अब वो थक गयी थी .बड़ी खुशनुमा शाम थी, कबीर और माया एक दूसरे का हाथ थामे लंदन की गलियों मैं चहलकदमी कर रहे थे .

कबीर अपनी जिन्दगी से खुश नज़र आ रहा था ,एक नज़र उसने माया की तरफ डाली ,ये वही पल था जब माया और कबीर दोनों की नज़रें मिली और दोनों के कदम ठहर से गए ,स्ट्रीट लाइट की रोशनी में लाल रंग के कपड़े पहने हुए माया उसे परी सी लगा रही थी ,माया का स्पर्श उसे जादू भरी दुनिया में ले जा रहा था ,उसने माया को अपनी बाहुपाश में लिया ,दोनों की गर्म सांसे टकराई एक नज़र उठा के माया ने कबीर की तरफ देखा फिर वो भी उस जादू मैं घिरती चली गयी दोनों के होठ कभी न अलग होने की कसमे ले कर एक दूसरे मैं समा गयी .

कबीर सबकुछ भूल कर इस पल को जी रहा था ,ऐसा ही कुछ माया के साथ हो रहा था ,वो निगाहों और स्पर्श के जादुई दुनिया से वापस आना ही नहीं चाह रही थी .

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