मंटो के जन्मदिन पर उनके अफ़साने पर एक छोटी सी रपट

आज मेरे सबसे प्यारे अफ़साने निगार सादत हसन मंटो का जन्मदिन है. मैंने उर्दू में उनकी कहानियाँ पढ़कर कहानी लिखना सीखी है. मंटो अपने ज़माने से आगे थे, जिसकी सज़ा मरते दम तक उन्हें मिलती रही. दक्षिणी एशिया के वे सबसे महान कहानीकारों में एक हैं. अगर नये लेखकों को मौक़ा मिले तो मंटो के अफ़साने ज़रूर पढ़ें. मंटो की कथा-शैली से बहुत कुछ सीख सकते हैं. टोबा टेग सिंह, खोल दो, काली सलवार, ठंडा गोश्त, बाबू गोपीनाथ जैसे कई ऐसे अफ़साने हैं, जो हमेशा अदब की दुनिया में अमर रहेंगे. मौपासा की तरह मंटो भी 42 साल की उम्र में ही इस दुनिया से रुखसत हो गये. लेकिन अपने पीछे छोड़ गये ढेर सारे लाजवाब बेहतरीन अफ़साने, जिनके बारे में अक्सर अदबी दुनिया में चर्चा होती रहेगी. मंटो के अफ़साने में इंसानी ज़िंदगी की हक़ीक़त, उम्दा कथानक, रोमाँच और सस्पेंस बहुत गहराई तक समायी हुई है. बहुत कम ही अफ़साने निगार कहानी का इतना बेहद उम्दा प्लाट गढ़ने में कामयाब है. एक तरफ़ उर्दू के दूसरे बड़े अफ़साने निगार कृष्ण चंदर को मंज़र निगारी में महारत हासिल थी, तो दूसरी तरफ़ मंटो कहानी वो सस्पेंस गढ़ने में महारत हासिल है, जो कभी कृष्ण चंदर को भी नसीब नहीं हुआ.

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