राकेश शंकर भारती का कहानी-संग्रह नीली आँखें की समीक्षा

 

नीली आँखें- पूर्वी यूरोप और यूक्रेन के समाज पर रोमाँचक कहानियों का अनोखा संग्रह

राकेश शंकर भारती का कहानी संग्रह नीली आँखें दस कहानियों का अनूठा संग्रह है

इस बार हम नवजागरण प्रकाशन की तरफ़ से सिर्फ़ पूर्वी यूरोप के समाज और परिवेश पर आधारित कहानियों को ही जगह दे रहे हैं। “नीली आँखें” की सारी कहानियाँ काफ़ी दिलचस्प और रोमाँस से भरा हुआ है और इस संग्रह में मानवीय जीवन की संवेदना को बड़े ही दिलचस्प तरीक़े से ब्यान किया गया है। आधुनिक कहानी का सिलसिला उन्नीसवीं सदी में शुरू होकर अब तक काफ़ी लंबा सफ़र तय कर चुका है। इतने सालों में कहानी की विधा में बहुत ज़्यादा तब्दीली आ चुकी है। आज की दौर में कहानी की विधा पर कलम चलाना आसान नहीं है। दुनिया के हर हिस्से में अनगिनत कहानियाँ लिखी जा चुकी हैं। लेकिन भारती जी ने आज के दौर में इस बदलते परिवेश में भी अपनी कहानियों में रोमांस और सस्पेंस को बरकरार रखा है। सारी कहानियाँ ख़ुद में अनोखी और लाजवाब है।
जब लेखक रुसी भाषा और साहित्य की शिक्षा प्राप्त करने के लिए यूक्रेन गये तो वहाँ की लड़की की ख़ूबसूरती में फँसकर मुहब्बत को दिल से महसूस कर चुके हैं। रूसी-यूक्रेनियाई मूल की लड़की से शादी की और अभी दो बच्चों के बाप हैं। भारती जी अपनी कहानियों के ज़रिए पूर्वी यूरोप की हसीनाओं की नैसर्गिक सुंदरता को भी बड़े ही रोचक तरीक़े से ब्यान करते हैं। उन्होंने पूर्वी यूरोप की मानवीय संवेदना को दिल से महसूस किया है, जिसकी झलक भारती जी की कहानी में बख़ूबी देखने को मिलती है। कभी-कभी तो कहानियों को पढ़कर ऐसा लगता है कि भारती जी ख़ुद अपनी कहानी कह रहे हैं। लेखक का दिल गंगा के पवित्र जल की तरह साफ़ और निर्मल है। यह झाँकी उसकी कहानी में भी देखने को मिलती है। दुनिया के हर हिस्से में मानवीय संवेदना एक जैसी ही है, भले ही हम काले हों, गौरे हों, गेहूँए हों, पीले हों। कहानीकार धर्म, जाति, कौम, नस्ल वगैरह के भेदभाव किए बिना बड़ी ईमानदारी और बेवाक़ी से अपनी बात पाठकों के सामने रखते हैं। आपकी कहानियाँ रोमाँस, प्यार-मुहब्बत, उम्मीदों और नये सपनों से लबालब है। आपकी कहानी हर वर्ग के पाठकों को अपनी तरफ़ खींचती है। कोई पाठक एक बार भारती जी की कहानी पढ़ना शुरू करते हैं तो कहानी को आख़िर तक पढ़कर ही साँस लेते हैं।

“बस एक रात” काफी बेहतरीन कहानी है। यह कहानी सबसे पहले हिंदी के लोकप्रिय ऑनलाइन पत्रिका Jankipul.com पर आ चुकी है। नताशा बचपन से लेकर चढ़ती जवानी तक ढेर सारे सपने देखती है। यह कहानी बड़े ही रोचक अंदाज़ में अपनी चरमोत्कर्ष पर पहुँचती है और अचानक कहानी समापन की तरफ रुख करती है। बस एक रात का ख्व़ाब, जो हमेशा ख्व़ाब बनकर रह जाता है। यह कहानी पाठक को सोचने पर मज़बूर करती है। ये जो देह हैं, यह हमारी मज़बूरी है। जिस्मानी प्यास महज़ एक प्यास है। दो देहों की ज़रूरत है। इसी प्यास की चाहत को पूरा करने की आड़ में मानवीय श्रृष्टि टिकी हुई है। कभी बेताबी तो कभी बिछड़न भी देती है। इस कहानी आज के दौर बेहतरीन नमूने के तौर पर देखी जा सकती है।

“मेरा बाप” भी कम दिलचस्प नहीं है। आज की दौर में हिंदी में जहाँ विविधता की बहुत ज़्यादा कमी है, वहाँ भारती जी की यह कहानी बेहतरीन मिशाल है। कहानीकार ने इस कहानी में नयापन देने की भरपूर कोशिश की है। कहानी पढ़कर ऐसा लगता है कि सच में भारती जी की कहानी में नयापन है। कहानी मेरा बाप में एक बाप और बेटी की इत्तेफ़ाक की मुलाक़ात वाकई पाठकों के रोंगटे खड़ा कर देती है। इत्तेफ़ाक से बाप और बेटी की कभी भी मुलाक़ात नहीं हो सकी। जब बेटी बड़ी हो जाती है तो अपने बाप को ढूँढ़ निकालती है। फिर बेटी के प्रति एक बाप की भावना आप ख़ुद से इस कहानी में पढ़ें। दिल में हिलकोर पैदा करेगी यह कहानी।

भारती जी की लघु उपन्यास या लंबी कहानी “दो हसीनाओं की प्रेम कहानियाँ” इस संग्रह की सबसे रोमांचक कहानी है। इसमें दो ख़ूबसूरत औरतों की कहानी है। हिंदी कथा साहित्य में इस तरह की पहली कहानी है। दो औरतों की भावना कभी ना कभी एक मर्द के साथ जुड़ी हुई थी। वक़्त गुज़रने के साथ सब कुछ बदल गया। यह तबदीली इस में देखी जा सकती है। दोनों हसीनाएँ एक दिन एक ही जगह पर एक ही महफ़िल में अपने महबूब से मिल लेती हैं। अपने खून से, अपनों से मुलाक़ात होती है। सब कुछ यहाँ बता देने पर कहानी पढ़ते समय आपको मज़ा नहीं आयेगा। इसी तरह से दस कहानियाँ हिंदी साहित्य में नया प्रयोग है। भारती जी ने कहानी में विविधता लाने की भरपूर कोशिश की है।
आपकी भाषा शैली काफ़ी लुभावनी है। आप अपनी कहानियों में शब्दों का चयन बड़ी ही चतुराई से करते हैं। बड़े विद्वान से लेकर आम पाठकों तक को आपकी भाषा-शैली काफ़ी लचीली और आकर्षक लगती है। कहानियों की भाषा बड़ी सहज और सीधी-सादी है। आपकी भाषा शैली पाठकों को किसी भी तरीक़े से निराश नहीं करती है। कहानीकार कौम, मज़हब, राजनीति और जाति से ऊपर उठकर ईमानदारी से कहानी ब्यान करते हैं। हमें उम्मीद है कि “नीली आँखें” आपको काफ़ी पसंद आयेगी।

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