मैं किंडल पर क्यों पढता हूँ?

आप किंडल पर क्यों पढ़ें यह आपका व्यक्तिगत मामला है। इस बारे में मैं कुछ नहीं बोल सकता। ये बताता हूँ कि मैं क्यों पढ़ता हूँ। मेरी किताबों से पहचान शैशव में हुई थी। पिताजी वयस्क शिक्षा में पर्यवेक्षक थे तो उनके पास बड़े बड़े कैलेंडर जैसे चार्ट थे अक्षर ज्ञान के लिये। कुछ चार्टों को लाकर पिताजी ने घर […]

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वो हमारे बाप हैं

पटना में आखिरी दिन था। केरल जाने का प्लान बन चुका था। सो पटना में कमरा खाली किया और चल दिए घर। पटना जंक्शन तक तो आयुष ने पंहुचा दिया और वहाँ से सोमनाथ ने सामान भी ट्रेन में लाद दिया। लेकिन सहरसा पहुँचते पहुँचते समस्या पैदा हो गयी। ट्रैन को १० बजे रात में पहुँचना था लेकिन पहुँची २ […]

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सिगरेट की आग

“आप सिगरेट पीने लगे हो न?” “नहीं तो। किसने बोला तुम्हें?” “किसी ने नहीं। आपके दाँत काले दिख रहे हैं।” “…” “गुस्सा हो गये क्या?” “…” “बोलो न?” “…” “मैंने तो वैसे ही कहा था। आप गुस्सा हो गए।” “नहीं, गुस्सा नहीं हूँ। सोच रहा हूँ कि ये सब तुम सोचती कैसे हो। और ये सब सोचती ही क्यों हो?” […]

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