ऐसी वैसी औरत -ए मस्ट रीड बुक

नये समाज को बारीक चश्मे से देखती किताब! घने बादलों के बीच चमकती बिजली देखने में जितनी अच्छी लगती है गिरने पर उतनी ही विनाशकारी….हम सबके जीवन में कुछ ऐसी ही कहानियां छुपी या जुड़ी होती हैं जिन्हें या तो दफ्ना दिया जाता या समय के साथ सज़ा भुगतने को छोड़ दिया जाता है! मगर लाचारी, कमज़ोरी, हवस और बहकावे […]

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अखबार – एक कविता

आशावान हूं, सपनों में खुशियां अपार देख लेता हूं! बहुत खुश होता हूं कभी तो अखबार देख लेता हूं! क्या होता है अखबारों में? घपलों और घोटालों की खबरें ! बिजली पानी और निवालों की खबरें, स्याह चेहरे और सफेद रुमालों की खबरें, दो धर्मों के प्रेम में ज़हर घोलने वालों की खबरें, भ्रम नहीं पालता मगर दुनिया फिर भी […]

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त्याग_नहीं_प्यार_कहो

बुरे समय के लिये बचाये गये पैसों से, तिनका तिनका जोड़ कर अपने खुद के घर के लिये बचाये पैसों से, अपने कपड़ों की क्वालिटी और क्वान्टिटी दोनों में ही समझौता करके बचाये गये पैसों से, पूरे दिन में तीन की जगह एक कप चाय को ही दो बार बांट कर बचाये गये पैसों से, फीस दी जाती रही हम […]

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हिन्दी का सम्मान करें

हिन्दी, हमारी राष्ट्रभाषा, हमारी मातृभाषा, व्यवहार की भाषा! स्कूलों की सामान्य बोलचाल की भाषा अब “हिंग्लिश” या “इंग्लिश” होती जा रही! हिन्दी पढ़ाई ही जाती है और कोशिश की जाती है बच्चा बोले तो अंग्रेजी के मानसरोवर से चुने हुये शब्दपुष्प झरने लगे उसके मुख से! अध्ययन अध्यापन में भी हिन्दी विभाग को छोड़कर अन्यान्य विषयों को या तो अंग्रेजी […]

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बदलते स्कूल

अब अप्रैल में नया सत्र शुरु हो जाता है, मगर कुछ साल पहले तक अप्रैल भर हम सबके पेपर होते थे| धूल भरी आंधी और तेज़ धूप, अम्बिया के पेड़ पर पत्थर चलाना पेपर के बाद और मिल जाये तो घर आकर उसकी चटनी बनवाना| पढ़ाई तो स्कूल वाले साल भर करवाते ही थे मगर आम तो साल में एक […]

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