मैं लेखक नहीं हूँ, लेकिन लेखक बनना चाहती हूँ।

आविष्कार

ये लेख मैंने खासतौर पर literature.life के लिए लिखा है। कृपया सभी महानुभवी इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने का कष्ट करें। ..कि मैंने १०००० तीर में दो निशाने पे लगाये या पाँच??? ???☺☺   कल रात मुझे नींद नहीं आ रही थी। दिमाग किसी उलझन में भटक रहा था। मैंने सोचा…   आबादी कितनी बढ़ रही है। हवा में कितना […]

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शौचालय : एक हास्य कथा

पप्पू    “हेलो” चप्पू    “हाँ पप्पू भाई, हम अउ गप्पू गाँव से बम्बई आयेन है। सोचा तुमहू से मिल्लेई । तुम हौ कहाँ ??” पप्पू    का..?  तुम अउ गप्पू बम्बई आये हौ ? कब ? कहाँ? का करे ?” चप्पू    “अरे रुको पप्पू भाई तुम तो सवालन के झाड़ी लगाये हौ। अरे पप्पू भाई हम अउ गप्पू […]

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गीत – कैसे बनाये अपनी प्रेम कहानियाँ

लम्बी जिंदगानी की छोटी सी जवानी में, कैसे बनाये अपनी, हम प्रेम कहानियाँ,   सावन में भीगे, दरिया में डूबे, या फिर बैठे किसी पेड़ों की छांव, तारों को छू लें, बाहों में झूलें, या फिर चले किसी सपनों के गांव, परबतों, पहाड़ों में, दुनिया की दीवारों में, कैसे लिखायें अपनी, हम प्रेम कहानियाँ, कैसे बनाये अपनी….   दुनिया को […]

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प्यारे बाबा

सर्दी की सुबह। कैसी होती है सर्दी की सुबह? आपको तुरंत ख्याल आया होगा, सर्दी की सुबह मतलब प्यारी सुबह। जब आप सुबह-सुबह तरोताज़ा होकर, सूरज की नर्म-ओ-नाजुक धूप में अपनी छत या बॉलकनी में बैठ जाते हैं अखबार लेकर। और साथ में चाय और पकौड़े का नाश्ता। अगर दिन काम का है तो एसी वाला ऑफिस और दिन छुट्टी […]

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लम्हा-लम्हा जिंदगी का

गजल  लम्हा-लम्हा जिंदगी का यूँ गुजर जाता है, जिस्म से जैसे कोई बोझ उतर जाता है। चलती है सांसों पे ऐसे मेरी जिंदगी, पांव में जैसे कोई कांटा चुभ जाता है। तेरी यादों के सहारे उम्र यूँ गुजरती है, जख्म जैसे गहरे कोई वक्त भर जाता है। यारी मेरे यारों से इस तरह से छूटी है, आसमां से जैसे कोई […]

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ये मेरी डायरी है

  ये मेरी डायरी है, जिसमें मैं मेरे जज्बात लिखती हूँ। मुझे लेखन की वेरायटी नहीं आती, लेकिन, लिखना अच्छा लगता है, इसलिये लिखती हूँ। मैं लेखक बनूँ या न बनूँ, कोई किताब छपे या नहीं,  मैं फिर भी लिखना चाहती हूँ, क्योंकि, मेरा मानना है कि लिखने से हमारे विचार, जज्बात, सपने सब जिंदा रहते हैं। तब भी.. जब […]

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