हिंदी साहित्य में कहानी और उपन्यास की विधा में जागरूकता लाना

मंटो के जन्मदिन पर उनके अफ़साने पर एक छोटी सी रपट

आज मेरे सबसे प्यारे अफ़साने निगार सादत हसन मंटो का जन्मदिन है. मैंने उर्दू में उनकी कहानियाँ पढ़कर कहानी लिखना सीखी है. मंटो अपने ज़माने से आगे थे, जिसकी सज़ा मरते दम तक उन्हें मिलती रही. दक्षिणी एशिया के वे सबसे महान कहानीकारों में एक हैं. अगर नये लेखकों को मौक़ा मिले तो मंटो के अफ़साने ज़रूर पढ़ें. मंटो की […]

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डार्क नाइट की समीक्षा

इस साल एक बार फिर से उपन्यास पढ़ने की ख़्वाहिश हुई। वैसे तो मैं ख़ुद एक कहानीकार हूँ और कहानियाँ पढ़ना ही ज़्यादा पसंद है। फिलहाल एक हज़ार शब्दों के अंदर भी कहानियाँ लिखी जा रही है। लेकिन ऐसी कहानियों में अभी भी अपने आपको बाँध नहीं पाता हूँ। मेरी कहानियाँ दो हज़ार से ऊपर शब्दों में होती हैं। खैर […]

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विश्व पुस्तक दिवस पर ज़िंदगी ५०-५० की समीक्षा

उपन्यास ज़िंदगी ५०-५० की समीक्षा राकेश शंकर भारती, द्नेप्रोपेत्रोव्स्क, यूक्रेन तारीख़- २३-०४-२०१८ विश्व पुस्तक दिवस पर ज़िंदगी ५०-५० की समीक्षा आपके सामने पेश है दो हफ़्ते पहले मैंने अमेज़न पर भगवंत अनमोल जी के उपन्यास, ज़िंदगी ५०-५० ऑनलाइन ख़रीदकर किंडल पर पढ़ा। अपने पारिवारिक झमेले और दोनों छोटे बच्चों से समय निकाल आख़िर तक यह उपन्यास पढ़ डाला। मुझे इस […]

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राकेश शंकर भारती का कहानी-संग्रह नीली आँखें की समीक्षा

  नीली आँखें- पूर्वी यूरोप और यूक्रेन के समाज पर रोमाँचक कहानियों का अनोखा संग्रह राकेश शंकर भारती का कहानी संग्रह नीली आँखें दस कहानियों का अनूठा संग्रह है इस बार हम नवजागरण प्रकाशन की तरफ़ से सिर्फ़ पूर्वी यूरोप के समाज और परिवेश पर आधारित कहानियों को ही जगह दे रहे हैं। “नीली आँखें” की सारी कहानियाँ काफ़ी दिलचस्प […]

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