Literature Life

मिसेज़ सिंह का स्मार्टफोन

मिसेज सिंह आजकल रौनक-ए-बज़्म हैं,उनके चेहरे का नूर गज़ब का है/ उनकी बढ़ती उम्र मानो थम सी गई है/ लोगबाग उनकी बढ़ती उम्र और चढ़ते जादू का सीक्रेट पूछते हैं तो वो मुस्कराकर रह जाती है/ उनके वय की महिलाएं जहां बुढ़ापे की दहलीज पर खड़ी हांफ रही हैं वे सब शुगर और बीपी जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं वहीं […]

Read more

स्पेन – धूप, फ्लेमेंको और बुल फाइट

पिछले दिनों स्पेन की यात्रा पर रहा. ब्रिटेन की नम और ठंडी आबोहवा से कुछ समय का अवकाश पाने के लिए ब्रिटेनवासी अक्सर स्पेन के गर्म और धूप से नहाए समुद्रतटों का रुख करते हैं. खासतौर पर गर्मियों के महीनों में स्पेन के समुद्रतटीय इलाके ब्रिटेश सैलानियों से भरे होते हैं. पिछले कुछ दशकों में पर्यटन एजेंसियों और टूर ऑपरेटरों […]

Read more

लघु कथा – चांडाल-चैकड़ी

‘‘पहली वो, वो स्त्रियों के सौन्दर्य का सामान, कट-पीस का ब्लाउज, पेटीकोट आदि बेचा करती थी मगर रोड पर दुकान न होने के कारण उसका माल बिक नहीं पाता था वैसे वो बहुत सी महिलाओं के घर जाकर भी कुछ न कुछ बेचने का प्रयास किया करती थी। दूसरे वो, वो नौकरी से रिटायर थे, पेंशन पर्याप्त थी, परिवार छोटा […]

Read more

लघु कथा – बेटियों वाले बाप

‘‘पुलिस वाले ने नजर का इशारा किया तो वर्मा जी उसके पीछे-पीछे हो लिये। दोनों थाने के पीछे आ गये। थाने के पीछे तालाब था। दोनों पेशाब करने की पोजीशन बनाकर थाने की तरफ पीठ करके बातें करने लगे। पुलिस वाले ने पूछा ‘‘तो तुम कहते हो कि वो लड़की तुम्हारी नहीं है’’? वर्मा जी ने ढिठाई से जवाब दिया […]

Read more

लघु कथा – काफ़िर लड़की

पौ फटने वाली थी ,अँधेरे ने रात का दामन नही छोडा था। उन दोनों  के बार्डर पार करने का यही सबसे मुफीद वक्त था,जब फौजी दरयाफ्त कम से कम होती थी। हाड कंपाती ठंड मे एक ने दूसरे से पूछा “अमजद ,तूने सच मे गोली मारी थी उस लडकी को? दूसरे ने ठंडे स्वर मे कहा “हाँ सुबेह,तुम्हें शक क्यों  […]

Read more

हिन्दी लेखक शोषित वर्ग में क्यों आता है?

हिन्दी लेखक सच ही शोषित वर्ग में आता है … पर इसके लिए वह स्वयं दोषी है। कारण देखिए – जिस पल कोई लेखक अपनी किताब लेकर बाजार में आ जाता है, वह बाजार का हिस्सा बन जाता है। बाजार अपने नियमों से चलता है, वह इस बात से प्रभावित नहीं होता कि यह बंदा खुद को साहित्यकार कहता है […]

Read more
1 2 3 4 5 6