लघु कथा – सही आलोचक

आपने भारत की किसी यूनिवर्सिटी में किसी भी पद पर बिना सिफ़ारिश ( वह भी टॉप की ) कोई नियुक्ति न कभी देखी होगी, न पाई । प्रोफ़ेसर वर्मा भी बड़े जतन से सागर वि वि के हिंदी विभाग में तब रोपित किए गए थे जब वह तब के वि वि के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ राकेश जी के बरसों से […]

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कहानी – आक् थू

उसकी आंखें याद आती हैं। गरमी के दिन थे। आंखें चौंधिया देने वाली धूप। सड़कें सूनीं थीं। मैं मेन गेट से बाहर निकल रहा था और वह भीतर आ रही थी। हरी सलवार में। पीली चुनरी सिर पर। मुझे देखा तो मुस्कुरा कर सिर हिलाया। लगा जैसे धूप में बिजली कौंध गई हो। तेज रौशनी के कारण मेरी मिंची हुई […]

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मिसेज़ सिंह का स्मार्टफोन

मिसेज सिंह आजकल रौनक-ए-बज़्म हैं,उनके चेहरे का नूर गज़ब का है/ उनकी बढ़ती उम्र मानो थम सी गई है/ लोगबाग उनकी बढ़ती उम्र और चढ़ते जादू का सीक्रेट पूछते हैं तो वो मुस्कराकर रह जाती है/ उनके वय की महिलाएं जहां बुढ़ापे की दहलीज पर खड़ी हांफ रही हैं वे सब शुगर और बीपी जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं वहीं […]

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लघु कथा – चांडाल-चैकड़ी

‘‘पहली वो, वो स्त्रियों के सौन्दर्य का सामान, कट-पीस का ब्लाउज, पेटीकोट आदि बेचा करती थी मगर रोड पर दुकान न होने के कारण उसका माल बिक नहीं पाता था वैसे वो बहुत सी महिलाओं के घर जाकर भी कुछ न कुछ बेचने का प्रयास किया करती थी। दूसरे वो, वो नौकरी से रिटायर थे, पेंशन पर्याप्त थी, परिवार छोटा […]

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लघु कथा – बेटियों वाले बाप

‘‘पुलिस वाले ने नजर का इशारा किया तो वर्मा जी उसके पीछे-पीछे हो लिये। दोनों थाने के पीछे आ गये। थाने के पीछे तालाब था। दोनों पेशाब करने की पोजीशन बनाकर थाने की तरफ पीठ करके बातें करने लगे। पुलिस वाले ने पूछा ‘‘तो तुम कहते हो कि वो लड़की तुम्हारी नहीं है’’? वर्मा जी ने ढिठाई से जवाब दिया […]

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लघु कथा – काफ़िर लड़की

पौ फटने वाली थी ,अँधेरे ने रात का दामन नही छोडा था। उन दोनों  के बार्डर पार करने का यही सबसे मुफीद वक्त था,जब फौजी दरयाफ्त कम से कम होती थी। हाड कंपाती ठंड मे एक ने दूसरे से पूछा “अमजद ,तूने सच मे गोली मारी थी उस लडकी को? दूसरे ने ठंडे स्वर मे कहा “हाँ सुबेह,तुम्हें शक क्यों  […]

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 ‘आदत की रोटी’

”ठीक से बेलो”! ”अरे परथन बार-बार क्यों लगा रही हो ”! ”कितने साल हो गए, बराबर रोटी बेलना नहीं आया”! “कैसे बेलती हो ? बीच में पतला -किनारे मोटा”? गोल-गोल घुमाओ रोटी को”! ”बराबर डालो तवे पर, अरे देखो मुड़ गया न..अब फूलेगा नहीं। मिनट बाद ही कड़ा हो जायेगा ”! ”ठीक से सेंको!चिमटा साइड से दबाओ भई ! अरे […]

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अफ़जल अहमद की हिंदी कहानी – मिस रनर

                         मिस रनर        ‘एक मिनट, ज़रा मोबाइल और हेडफ़ोन ले लूँ!’ एकाएक मुझे याद आया।         यूँ तो मैं हर रोज़ ही सुबह 5 बजे उठ जाता हूँ और शायद मेरे दरवाजा खोलने की आवाज़ से मेरे पड़ोसी भी।         ‘मेरे पड़ोसी?’         नहीं समझे आप? मेरे पड़ोसी यानी कि मकान में रहने वाले दूसरे किराएदार।         हॅलो दोस्तों, […]

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