‘आदत की रोटी’

”ठीक से बेलो”! ”अरे परथन बार-बार क्यों लगा रही हो ”! ”कितने साल हो गए, बराबर रोटी बेलना नहीं आया”! “कैसे बेलती हो ? बीच में पतला -किनारे मोटा”? गोल-गोल घुमाओ रोटी को”! ”बराबर डालो तवे पर, अरे देखो मुड़ गया न..अब फूलेगा नहीं। मिनट बाद ही कड़ा हो जायेगा ”! ”ठीक से सेंको!चिमटा साइड से दबाओ भई ! अरे […]

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अफ़जल अहमद की हिंदी कहानी – मिस रनर

                         मिस रनर        ‘एक मिनट, ज़रा मोबाइल और हेडफ़ोन ले लूँ!’ एकाएक मुझे याद आया।         यूँ तो मैं हर रोज़ ही सुबह 5 बजे उठ जाता हूँ और शायद मेरे दरवाजा खोलने की आवाज़ से मेरे पड़ोसी भी।         ‘मेरे पड़ोसी?’         नहीं समझे आप? मेरे पड़ोसी यानी कि मकान में रहने वाले दूसरे किराएदार।         हॅलो दोस्तों, […]

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यूट्यूब चैनल ‘GENERAL डिब्बा’ के लिए कहानियाँ भेजें

उभरती हुई लेखकीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहन और पहचान देने के लिए लिटरेचर लाइफ ने लोकप्रिय यूट्यूब चैनल ‘GENERAL डिब्बा’ को लिटरेचर लाइफ के लेखकों को अपने चैनल पर स्थान देने का अनुरोध किया है. इस अनुरोध को स्वीकारते हुए GENERAL डिब्बा ने हमारे लेखकों से उनकी नई और मौलिक कहानियाँ माँगी हैं. उनमें से जो कहानियाँ उन्हें पसंद आएँगी उनकी ऑडियो-वीडियो […]

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सोने का पेन

स्कूल में प्रिंसिपल ने एक सबसे तेज़ पढ़ने वाले बच्चे को बुलाया और एक सबसे शरारती तत्व को। उनके सामने एक सोने से बना हुआ बाल पेन रख दिया। फिर पढ़ने वाले बच्चे से पूछा कि तुम इस पेन में से क्या चीज लेना पसंद करोगे, रिफील या कि इसकी बॉडी? उसने जवाब दिया सर में इसकी रिफील लूंगा ताकि […]

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देवेंद्र शर्मा की कहानी : रखैल

एक कमरा है। सीलनभरा अँधेरा कमरा। गली के आखिर में टिके एक जर्जर से मकान की पहली मंजिल का कमरा। कमरे के घुप्प अँधियारे में रोशनी का एक कतरा ठहरा हुआ है, जिसका कारण उसकी खिड़की का टूटा हुआ पल्ला है। खिड़की में लगा लकड़ी का पल्ला, जिसका आखिरी कोना नमी से सड़कर झड़ चुका है और बाकी का हिस्सा […]

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वो हमारे बाप हैं

पटना में आखिरी दिन था। केरल जाने का प्लान बन चुका था। सो पटना में कमरा खाली किया और चल दिए घर। पटना जंक्शन तक तो आयुष ने पंहुचा दिया और वहाँ से सोमनाथ ने सामान भी ट्रेन में लाद दिया। लेकिन सहरसा पहुँचते पहुँचते समस्या पैदा हो गयी। ट्रैन को १० बजे रात में पहुँचना था लेकिन पहुँची २ […]

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सिगरेट की आग

“आप सिगरेट पीने लगे हो न?” “नहीं तो। किसने बोला तुम्हें?” “किसी ने नहीं। आपके दाँत काले दिख रहे हैं।” “…” “गुस्सा हो गये क्या?” “…” “बोलो न?” “…” “मैंने तो वैसे ही कहा था। आप गुस्सा हो गए।” “नहीं, गुस्सा नहीं हूँ। सोच रहा हूँ कि ये सब तुम सोचती कैसे हो। और ये सब सोचती ही क्यों हो?” […]

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शौचालय : एक हास्य कथा

पप्पू    “हेलो” चप्पू    “हाँ पप्पू भाई, हम अउ गप्पू गाँव से बम्बई आयेन है। सोचा तुमहू से मिल्लेई । तुम हौ कहाँ ??” पप्पू    का..?  तुम अउ गप्पू बम्बई आये हौ ? कब ? कहाँ? का करे ?” चप्पू    “अरे रुको पप्पू भाई तुम तो सवालन के झाड़ी लगाये हौ। अरे पप्पू भाई हम अउ गप्पू […]

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प्यारे बाबा

सर्दी की सुबह। कैसी होती है सर्दी की सुबह? आपको तुरंत ख्याल आया होगा, सर्दी की सुबह मतलब प्यारी सुबह। जब आप सुबह-सुबह तरोताज़ा होकर, सूरज की नर्म-ओ-नाजुक धूप में अपनी छत या बॉलकनी में बैठ जाते हैं अखबार लेकर। और साथ में चाय और पकौड़े का नाश्ता। अगर दिन काम का है तो एसी वाला ऑफिस और दिन छुट्टी […]

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छुआछूत (लघुकथा)

‘अ’ पहली बार अपने दोस्त ‘ब’ के घर गया, वहां देखकर उसने कहा,  “तुम्हारा घर कितना शानदार है – साफ और चमकदार” “सरकार ने दिया है, पुरखों ने जितना अस्पृश्यता को सहा है, उसके मुकाबले में आरक्षण से मिली नौकरी कुछ भी नहीं है, आओ चाय पीते हैं” चाय आयी, लेकिन लाने वाले को देखते ही ‘ब’ खड़ा हो गया, […]

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