आलोचना , समालोचना और समीक्षा शब्द की व्याख्या

आलोचना , समालोचना और समीक्षा शब्द की व्याख्या ! नोट : यह एक ऐसा विषय है जिस पर सैकड़ों किताबें बाजार में उपलब्ध हैं । कई पुस्तकों को पढ़ने के बाद भी जब तक अपनी खुद की चिंतन पद्धति विकसित न हो ; इस विषय को लेकर संशय की स्थिति बनी रहती है । इस आलेख में मैं सिर्फ आलोचना […]

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कथा-संरचना: शैली-१

‘Genre’ कहिए, विधा या अंग कहिए, एक कथा या पुस्तक को ख़ास शैली में रख कर तो देखना ही होता है। आज अगर अमेज़न पर लिस्ट देखेंगे तो हिंदी की अधिकतर किताबें Literature —->Fiction या short stories में होगी। इसके अतिरिक्त भी हैं, जैसे बाल-साहित्य, आध्यात्म, यात्रा-संस्मरण, अकादमिक, इतिहास इत्यादि। पर कई पारंपरिक अंग जैसे निबंधकार लेखक और पाठक अब […]

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राइटर्स ब्लॉक को कैसे तोड़ें?

जब समरसिद्धा लिखने बैठा तो न तो कोई कहानी थी और न कोई रूपरेखा। तब तो मैं खुद को लेखक भी नहीं समझता था। उपन्यास तो बहुत दूर तब तक तो कोई लघुकथा भी नहीं लिखी थी। मगर बचपन से ही जब छोटी छोटी पॉकेट बुक पढ़ता था एक हसरत सी थी कि बड़ा होकर एक उपन्यास लिखूँगा जिसमें फंतासी […]

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कथा संरचना: कथावाचक (नैरेटर) की भूमिका

अक्सर पहली पंक्ति से ही स्पष्ट हो जाता है कि कथावाचक है कौन? अमूमन लेखक स्वयं ही कथावाचक होते हैं। यही सुलभ भी है। पर लेखक कथा में हों, यह आवश्यक नहीं। अगर लेखक कथा में होते भी हैं, तो उनकी भूमिका नायक की तरह लगभग नहीं होती। वो तटस्थ रूप से कथा कहते रहते हैं, पात्रों से बतियाते हैं […]

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हिन्दी लेखक शोषित वर्ग में क्यों आता है?

हिन्दी लेखक सच ही शोषित वर्ग में आता है … पर इसके लिए वह स्वयं दोषी है। कारण देखिए – जिस पल कोई लेखक अपनी किताब लेकर बाजार में आ जाता है, वह बाजार का हिस्सा बन जाता है। बाजार अपने नियमों से चलता है, वह इस बात से प्रभावित नहीं होता कि यह बंदा खुद को साहित्यकार कहता है […]

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कथा संरचना – लेखन शैली पर कुछ बातें

प्रवीण झा ने कथा संरचना में पहली पंक्ति के महत्त्व पर जो बातें कही हैं उनसे ही आगे कहना चाहता हूँ. प्रवीण ने बहुत सही बात कही कि यदि पहली पंक्ति ही उत्सुकता न जगाए तो पढ़ने का उत्साह ठण्डा पड़ने लगता है. दरअसल पहली पंक्ति ही नहीं बल्कि पहला पूरा पैराग्राफ ही बहुत महत्वपूर्ण होता है. पहला पैराग्राफ ही […]

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कथा संरचना: पहली पंक्ति का महत्त्व

किसी भी उपन्यास, कथा या फ़ेसबुक पोस्ट का पहला वाक्य एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज के समय में पहला वाक्य पढ़ कर ही लोग रचना जाँच लेते हैं, पर यह पहले भी था। शातिर प्रकाशक भी यह खूब समझते हैं। गर आप किताब लिखने बैठे, और पहले वाक्य को बार–बार काट कर ठीक कर रहे हैं, तो उस उपन्यास का […]

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हिंदी लेखक – रूपए की नहीं, डॉलर की सोचिए

साहित्यिक क्रांतियाँ और मापदंडों से अलग अपनी राह बनाना वैश्विक है। जहाँ-जहाँ प्रकाशकों और साहित्यकारों की गोलबंदी हुई, या किसी आर्थिक कारण से साहित्य थम गया, या बाहरी कारणों से समस्या हुई, वहाँ साहित्य ने अपनी नई राह चुनी है। अक्सर ऐसे साहित्य की शुरूआत कुछ बिंदास युवाओं ने होठों में सिगरेट दबाए और धुआँ उड़ाते ही की। जैसे स्थापना […]

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इरॉटिका, इरॉटिक रोमांस और पोर्न में अंतर क्या है?

जब मैंने ‘डार्क नाइट’ लिखना शुरू किया और लोगों से कहा कि वह एक इरॉटिक रोमांस होगा तो कई भौहें नृत्य करने लगीं। कई किस्म के प्रश्न उठे, क्या वह एक और फिफ्टी शेड्स टाइप का उपन्यास होगा से लेकर क्या वह मस्तराम या सविता भाभी जैसा होगा? लोग आमतौर पर इरॉटिक रोमांस, इरॉटिका और पोर्न के बीच अंतर नहीं […]

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मैंने इरॉटिक रोमांस क्यों लिखा?

डार्क नाइट लिखते समय मन में कई संशय और भय थे. पहली बात तो यह कि इरॉटिक विधा की मेरी स्वयं की जानकारी सीमित थी और दूसरी बात यह कि इसे पोर्न कहकर नकारा या दुत्कारा न जाए. मगर फिर भी मन में इस विधा पर लिखने की एक बलवती इच्छा थी. उसका सबसे बड़ा कारण मेरा अपना यह मत […]

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