इरॉटिका, इरॉटिक रोमांस और पोर्न में अंतर क्या है?

जब मैंने ‘डार्क नाइट’ लिखना शुरू किया और लोगों से कहा कि वह एक इरॉटिक रोमांस होगा तो कई भौहें नृत्य करने लगीं। कई किस्म के प्रश्न उठे, क्या वह एक और फिफ्टी शेड्स टाइप का उपन्यास होगा से लेकर क्या वह मस्तराम या सविता भाभी जैसा होगा? लोग आमतौर पर इरॉटिक रोमांस, इरॉटिका और पोर्न के बीच अंतर नहीं कर पाते। खासतौर पर भारतीय पाठक। सेक्स का चित्रण जिसे अँग्रेज़ी में ग्राफ़िक सेक्स कहा जाता है, मात्र किसी भी कहानी पर मस्तराम का लेबल लगा देने के लिए काफी होता है। मगर तीनों में अंतर होता है और वह अंतर बहुत महीन भी नहीं होता।

पोर्न जैसा कि सभी जानते हैं, का उद्द्देश्य यौन उत्तेजना मात्र होता है। कहानी, प्लाट, चरित्र चित्रण या चरित्रों की भावनात्मक दशा कोई खास महत्व नहीं रखते। पोर्न का पाठक पर असर भी क्षणिक उत्तेजना के रूप में ही होता है। पाठक चरित्रों से किसी किस्म का भावनात्मक लगाव पैदा नहीं कर पाता।

इरॉटिका में हालांकि मूल में सेक्स ही होता है और कहानी सेक्स के इर्द-गिर्द ही घूमती है मगर वह सेक्स के प्रसंगों के ज़रिए न सिर्फ पात्रों की यौन यात्रा की कहानी कहता है, बल्कि उस यात्रा के दौरान उन पर आए भावनात्मक असर का चित्रण भी करता है। इरॉटिका में रोमांस ज़रूरी नहीं है। कहानी सेक्स पर केंद्रित और उसी में सीमित हो सकती है। आमतौर पर इरॉटिका पढ़ते हुए पाठक पात्रों से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करता है।

इरॉटिक रोमांस इस मायने में अलग होता है कि उसके केंद्र में रोमांस होता है मगर उस रोमांस की यात्रा यौन संबंधों और यौन प्रसंगों के ज़रिए ही आगे बढ़ती है। सेक्स कहानी का एक अनिवार्य अंग होता है और उसे कहानी के मूल स्वरूप को बिगाड़े बिना हटाया नहीं जा सकता। इरॉटिक रोमांस का अंत प्रायः सुखद यानि रोमांटिक सम्बन्ध की पूर्णता में होता है।

इस आधार पर मैं डार्क नाइट को एक इरॉटिक रोमांस ही कहूँगा। और आप?

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