कहानी – आक् थू

उसकी आंखें याद आती हैं। गरमी के दिन थे। आंखें चौंधिया देने वाली धूप। सड़कें सूनीं थीं। मैं मेन गेट से बाहर निकल रहा था और वह भीतर आ रही थी। हरी सलवार में। पीली चुनरी सिर पर। मुझे देखा तो मुस्कुरा कर सिर हिलाया। लगा जैसे धूप में बिजली कौंध गई हो। तेज रौशनी के कारण मेरी मिंची हुई […]

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केवल कृष्ण का लघु उपन्यास – बोगदा (भाग १)

सुल्तान सिंग…ये नाम सुनकर आपने उसके बारे जैसी कल्पना की होगी, वह उसके ठीक उलट था. न तो उसकी कोई सल्तनत थी, और न डाकुओं जैसा कोई इलाका. न ही पहलवानों जैसी काया. पापड़ जैसा मुंह था उसका, लौकी जैसा शरीर. उस पर सफेद बनियान, जो पता नहीं कितनी पुरानी रही हो. पीली-सी और यहां-वहां फटी हुई भी. ढीला पाजामा. […]

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मिसेज़ सिंह का स्मार्टफोन

मिसेज सिंह आजकल रौनक-ए-बज़्म हैं,उनके चेहरे का नूर गज़ब का है/ उनकी बढ़ती उम्र मानो थम सी गई है/ लोगबाग उनकी बढ़ती उम्र और चढ़ते जादू का सीक्रेट पूछते हैं तो वो मुस्कराकर रह जाती है/ उनके वय की महिलाएं जहां बुढ़ापे की दहलीज पर खड़ी हांफ रही हैं वे सब शुगर और बीपी जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं वहीं […]

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क्यों प्रेम की शुरुआत पुरुष करते हैं और उसे निभाती महिलाएँ हैं?

डॉ. अबरार मुल्तानी कृत ‘क्यों प्रेम की शुरुआत पुरुष करते हैं और उसे निभाती महिलाएँ हैं? : स्त्री-पुरुष संबंधो को मधुर बनाने वाली पुस्तक’ का एक विहंगावलोकन।   “खुसरो दरिया प्रेम का, उलटी वा की धार । जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार ।।” पुस्तक की प्रेरणा पवित्र कुरआन की ये पंक्तियाँ हैं : ‘पति-पत्नी इक-दूजे के लिबास हैं […]

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स्पेन – धूप, फ्लेमेंको और बुल फाइट

पिछले दिनों स्पेन की यात्रा पर रहा. ब्रिटेन की नम और ठंडी आबोहवा से कुछ समय का अवकाश पाने के लिए ब्रिटेनवासी अक्सर स्पेन के गर्म और धूप से नहाए समुद्रतटों का रुख करते हैं. खासतौर पर गर्मियों के महीनों में स्पेन के समुद्रतटीय इलाके ब्रिटेश सैलानियों से भरे होते हैं. पिछले कुछ दशकों में पर्यटन एजेंसियों और टूर ऑपरेटरों […]

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कथा संरचना: कथावाचक (नैरेटर) की भूमिका

अक्सर पहली पंक्ति से ही स्पष्ट हो जाता है कि कथावाचक है कौन? अमूमन लेखक स्वयं ही कथावाचक होते हैं। यही सुलभ भी है। पर लेखक कथा में हों, यह आवश्यक नहीं। अगर लेखक कथा में होते भी हैं, तो उनकी भूमिका नायक की तरह लगभग नहीं होती। वो तटस्थ रूप से कथा कहते रहते हैं, पात्रों से बतियाते हैं […]

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लघु कथा – चांडाल-चैकड़ी

‘‘पहली वो, वो स्त्रियों के सौन्दर्य का सामान, कट-पीस का ब्लाउज, पेटीकोट आदि बेचा करती थी मगर रोड पर दुकान न होने के कारण उसका माल बिक नहीं पाता था वैसे वो बहुत सी महिलाओं के घर जाकर भी कुछ न कुछ बेचने का प्रयास किया करती थी। दूसरे वो, वो नौकरी से रिटायर थे, पेंशन पर्याप्त थी, परिवार छोटा […]

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