हिन्दी लेखक शोषित वर्ग में क्यों आता है?

हिन्दी लेखक सच ही शोषित वर्ग में आता है … पर इसके लिए वह स्वयं दोषी है। कारण देखिए – जिस पल कोई लेखक अपनी किताब लेकर बाजार में आ जाता है, वह बाजार का हिस्सा बन जाता है। बाजार अपने नियमों से चलता है, वह इस बात से प्रभावित नहीं होता कि यह बंदा खुद को साहित्यकार कहता है […]

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