हिंदी लेखक – रूपए की नहीं, डॉलर की सोचिए

साहित्यिक क्रांतियाँ और मापदंडों से अलग अपनी राह बनाना वैश्विक है। जहाँ-जहाँ प्रकाशकों और साहित्यकारों की गोलबंदी हुई, या किसी आर्थिक कारण से साहित्य थम गया, या बाहरी कारणों से समस्या हुई, वहाँ साहित्य ने अपनी नई राह चुनी है। अक्सर ऐसे साहित्य की शुरूआत कुछ बिंदास युवाओं ने होठों में सिगरेट दबाए और धुआँ उड़ाते ही की। जैसे स्थापना […]

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साहित्य बनाम सिनेमा

सत्य व्यास कुछ उदाहरणों से बता रहे हैं कि उपन्यासों के पृष्ठों में छपे दृश्य फ़िल्मी पर्दों पर किस तरह उकेरे जाते हैं, और उनमें कितने और कैसे फर्क होते हैं. फिल्म स्क्रिप्ट लिखने वालों के लिए बहुत काम के उदहारण हैं. कटी पतंग (उपन्यास)- गुलशन नंदा कटी पतंग (फिल्म) – राजश्री प्रोडक्शन्स पत्थर के होंठ (उपन्यास) – गुलशन नंदा खिलौना (फिल्म) […]

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