हिन्दी लेखक शोषित वर्ग में क्यों आता है?

हिन्दी लेखक सच ही शोषित वर्ग में आता है … पर इसके लिए वह स्वयं दोषी है। कारण देखिए – जिस पल कोई लेखक अपनी किताब लेकर बाजार में आ जाता है, वह बाजार का हिस्सा बन जाता है। बाजार अपने नियमों से चलता है, वह इस बात से प्रभावित नहीं होता कि यह बंदा खुद को साहित्यकार कहता है […]

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नाम लिटरेचर लाइफ क्यों?

एक प्रश्न उठा है कि हिंदी साहित्य की वेबसाइट का नाम ‘लिटरेचर लाइफ’ क्यों? अंग्रेज़ी नाम क्यों, हिंदी नाम क्यों नहीं? मेरे पास कोई विशेष उत्तर नहीं है. जिसने वेबसाइट बनाई उसने यूआरएल http://literature.life/ बना दिया, मैंने वेबसाइट का नाम भी वही रख दिया, लिटरेचर लाइफ. इंग्लैंड में रहता हूँ इसलिए मुझे अंग्रेज़ी का विरोध करने का कोई ख़ास कारण नज़र नहीं […]

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