मैं किंडल पर क्यों पढता हूँ?

आप किंडल पर क्यों पढ़ें यह आपका व्यक्तिगत मामला है। इस बारे में मैं कुछ नहीं बोल सकता। ये बताता हूँ कि मैं क्यों पढ़ता हूँ। मेरी किताबों से पहचान शैशव में हुई थी। पिताजी वयस्क शिक्षा में पर्यवेक्षक थे तो उनके पास बड़े बड़े कैलेंडर जैसे चार्ट थे अक्षर ज्ञान के लिये। कुछ चार्टों को लाकर पिताजी ने घर […]

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ताम्रपत्र से किंडल तक

हालिया एक प्रश्न पढ़ा कि अठारहवीं सदी के पूर्व की लिखी किताबें भारत में मूल रूप में नहीं मिलती। इसलिए विश्वसनीयता पर संदेह होता है। पहले ताम्र-पत्र, शिलाओं पर ही लेखन होता था। जब काग़ज और मुद्रण आया, तो छपने लगी। अब वो चाहे वेद व्यास हों या बाणभट्ट, मूल लिखी कॉपी आपको नहीं मिल पाई, तो इसमें उनका दोष […]

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