आखिर ‘साहिंदगी’ क्यों?

लेखन भले ही हमारा शौक हो, भले ही हम लेखन से आजीविका न कमाएँ या हम व्यवसायिक लेखन न करते हों, मगर हम सभी लेखक यह चाहते हैं कि हमारा लेखन सार्थक हो और हमारी एक अच्छे लेखक की पहचान बने। पाठक हमें पढ़ें और प्रकाशक हमें छापें। यह तभी सम्भव है जब हम अपनी लेखकीय पहचान के प्रति जागरुक हों और एक अच्छी पहचान एक अच्छी व्यवसायिक जागरुकता के बिना नहीं बनाई जा सकती। आज के इंटरनेट के युग में हमारा लेखन पुस्तकों या पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हमारी रचनाओं के ज़रिये ही नहीं जाना जाता बल्कि हर उस शब्द के ज़रिये जाना जाता है जो हम सार्वजनिक रूप से लिखते हैं, चाहे वह किसी ब्लॉग में हो, किसी वेबसाइट में हो या सोशल मीडिया में हो। हमारा लिखा हर शब्द हमारा लेखकीय अस्तित्व गढ़ता है। जितना ज़मीन में, उतना ही इंटरनेट की आभासी दुनिया में भी। ‘साहिंदगी’ का मूल उद्देश्य लेखकों और विशेषकर नए लेखकों को एक ऐसा प्लेटफार्म देना है जिसकी सहायता से वे अपने लेखकीय अस्तित्व को विकास और विस्तार दे सकें। वे अपने लिखे हर शब्द के प्रति जागरुक हों, हर शब्द की कीमत समझें और शब्द की कीमत पाएँ। ‘साहिंदगी’ में अपनी प्रोफाइल बनाएँ, अपना मौलिक लेखन करें और वरिष्ठ और स्थापित लेखकों से मार्गदर्शन पाएँ। यह आपकी अपनी वेबसाइट है, इसके ज़रिये अपने लेखन और अपने स्वयं को समृद्ध करें। आप समृद्ध होंगे तो साहित्य और समाज भी समृद्ध  होंगे।

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